अंतर राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में ‘द कशमीर फाईल्स’ को दुष्प्रचार करने वाली और भद्दी फिल्म बताया गया

53वें अंतर राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आयोजन हुआ। जो गोवा में आयोजित हुआ। जिसमें केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर एवं अन्य शीर्ष मंत्रीगण उपस्थित थे। गोवा में आयोजित अंतर राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के समापन समारोह को संबोधित करते हुए इफ्फी के जूरी प्रमुख और इजरायली फिल्मकार नदव लापिड ने फिल्म में ‘द कशमीर फाईल्स’ को प्रदर्शित किए जाने के संबंध में कहा कि, वह ‘परेशान और हैरान’ है और उन्होंने हिन्दी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को दुष्प्रचार करने वाली और भद्दी फिल्म बताया। 

अंतर राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में ‘द कशमीर फाईल्स’ को दुष्प्रचार करने वाली और भद्दी फिल्म बताया गया

53वें अंतर राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आयोजन हुआ। जो गोवा में आयोजित हुआ। जिसमें केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर एवं अन्य शीर्ष मंत्रीगण उपस्थित थे। गोवा में आयोजित अंतर राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के समापन समारोह को संबोधित करते हुए इफ्फी के जूरी प्रमुख और इजरायली फिल्मकार नदव लापिड ने फिल्म में ‘द कशमीर फाईल्स’ को प्रदर्शित किए जाने के संबंध में कहा कि, वह ‘परेशान और हैरान’ है और उन्होंने हिन्दी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को दुष्प्रचार करने वाली और भद्दी फिल्म बताया। 

आपकी जानकारी के लिए बतादें कि इस वार्षिक फिल्म महोत्सव का आयोजन फिल्म समारोह निदेशालय द्वारा किया जाता है, जो केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय का हिस्सा है। 

द वायर की खबर अनुसार लापिड ने कहा, ‘मैं इस कार्यक्रम की सिनेमाई समृद्धि और इसकी विविधता के लिए समारोह के प्रमुख और प्रोग्रामिंग निदेशक को धन्यवाद देना चाहता हूं। यह बेहतरीन था। हमने नवोदित प्रतियोगिता श्रेणी में सात फिल्में देखीं और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता श्रेणी में 15 फिल्में देखीं। उनमें से 14 में सिनेमाई गुण थे, अभाव था और विशद चर्चाएं थीं।’ 

उन्होंने आगे कहा, ‘हम सब ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म से हैरान और परेशान हैं। यह हमें एक दुष्प्रचार वाली और भद्दी फिल्म की तरह लगी, जो इतने प्रतिष्ठित फिल्म समारोह के एक कलात्मक और प्रतिस्पर्धी खंड के लिए अनुपयुक्त थी।’

लापिड ने कहा, ‘इस मंच पर मैं इस भावना को आपके साथ खुले तौर पर साझा करने में सहज महसूस कर रहा हूं, क्योंकि महोत्सव की भावना वास्तव में आलोचनात्मक चर्चा को स्वीकार कर सकती है, जो कला और जीवन के लिए जरूरी है।’ 

‘द कश्मीर फाइल्स’ 11 मार्च को रिलीज की गई थी। यह इफ्फी के ‘इंडियन पनोरमा सेक्शन’ का हिस्सा थी और इसका 22 नवंबर को प्रदर्शन किया गया था।

जैसा की आप सभी जानते है कि, इस फिल्म के लेखक और निर्देशक विवेक अग्निहोत्री हैं एवं निर्माता ज़ी स्टूडियोज है। पूरी फिल्म वर्ष 1990 में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा कश्मीरी पंडितों की हत्या के बाद कश्मीर से पलायन पर आधारित है। इस फिल्म में अभिनेता अनुपम खेर, दर्शन कुमार, मिथुन चक्रवर्ती और पल्लवी जोशी समेत अन्य प्रमुख किरदारों में हैं। 

फिल्मकार नदव लापिड के बयान के बाद डारेक्टर विवेक अग्निहोत्री का एक ट्विट आया, जिसमें कहा कि ‘सत्य सबसे खतरनाक चीज होती है। यह लोगों को झूठ तक बुलवा सकती है।’

अनुपम खेर ने एक वीडियो के माध्यम से ट्वीट करके कहा है, ‘कश्मीर फाइल्स का सच कुछ लोगो के गले में एक कांटे की तरह अटक गया है। वो ना उसे निगल पा रहे है ना उगल! इस सच को झूठा साबित करने के लिए उनकी आत्मा, जो मर चुकी है, बुरी तरह से छटपटा रही है। पर हमारी ये फ़िल्म अब एक आंदोलन है, फिल्म नहीं। तुच्छ टूलकिट गैंग वाले लाख कोशिश करते रहें।’ 

आपको याद दिलादें की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ की रिलीज के बाद कुछ राजनीतिक दलों ने (विशेषकर भाजपा ने) इसकी तारीफ की गई थी, तो वही कुछ राजनैतिक दलो ने बेहद हिंसक बताया था। 

उन्होंने कहा था, ‘इन दिनों द कश्मीर फाइल्स की खूब चर्चा हो रही है। जो लोग हमेशा अभिव्यक्ति की आजादी के झंडे लेकर घूमते हैं, वह पूरी जमात बौखला गई है।’

द वायर के अनुसार, फिल्म के सिनेमाघरों में प्रदर्शन के दौरान सांप्रदायिक नारेबाजी भी की गई थी। द वायर की पड़ताल में सामने आया था कि फिल्म के सिनेमाघरों में आने के शुरुआती हफ्तों में वहां से आक्रामक युवकों के हिंसा भड़काने और मुसलमानों के बहिष्कार का आह्वान करने वाले कई वीडियो सामने आए थे।